नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को मौत की सजा, 22 गवाहों और इन सबूतों ने पलट दी बाजी
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई गई। जानें 22 गवाहों, चार्जशीट और फोरेंसिक सबूतों से जुड़े अहम तथ्य।
मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। सौरभ राजपूत की हत्या और शव को ड्रम में छिपाने के इस मामले में पुलिस की करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट, 22 गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्य अहम रहे। फैसले से पहले अदालत में बचाव पक्ष ने कम सजा देने की मांग की, जबकि पीड़ित परिवार की ओर से मृत्युदंड की अपील की गई।
22 गवाहों के बयान से लेकर फोरेंसिक सबूत तक, ऐसे मजबूत हुआ केस
मेरठ के इस हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
जांच में चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और नीले ड्रम से जुड़े तथ्यों को सामने रखा गया। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले सबूतों के बारे में गवाही दी। वहीं, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से चोट लगने की पुष्टि हुई।
इन्हीं साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई हुई।
सजा पर सुनवाई के दौरान क्या-क्या दलीलें दी गईं?
सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों दोषियों से बातचीत की। जिला जज ने उनसे नाम, शिक्षा और परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी ली।
इसके बाद मुस्कान से पूछा गया कि क्या वह सौरभ की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद कुछ कहना चाहती है। इस पर उसने अपनी छोटी बेटी का ख्याल रखने की अपील की।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने दलील दी कि यह मामला सबसे दुर्लभ मामलों की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड के बजाय कम सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने मुस्कान की दो बेटियों और उसके बुजुर्ग माता-पिता का भी हवाला दिया।
वहीं, सौरभ के परिवार की ओर से पेश वकील विजय बहादुर सिंह ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए फांसी की मांग की। सरकारी वकील केके चौबे ने भी गंभीर अपराध में कम सजा दिए जाने का विरोध किया।
3 मार्च 2025 की रात क्या हुआ था?
सौरभ राजपूत ने 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में दोनों के बीच विवाद हुआ और वे अलग हो गए थे। बाद में परिवार के हस्तक्षेप से दोनों फिर साथ रहने लगे। इसी दौरान मुस्कान की अपने स्कूल के सहपाठी साहिल शुक्ला से नजदीकियां बढ़ने की बात सामने आई।
24 फरवरी 2025 को सौरभ लंदन से भारत लौटा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च की रात मुस्कान और साहिल ने कथित तौर पर खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सौरभ को बेहोश किया और फिर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी।
आरोप के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट भर दिया गया। यही वजह है कि यह मामला सामने आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बन गया था।
सौरभ की मां ने पहले ही की थी कड़ी सजा की मांग
मामले में सौरभ के परिवार ने शुरुआत से ही आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। सुनवाई से पहले सौरभ की मां ने कहा था कि अगर दोनों को फांसी नहीं हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी।
अभियोजन पक्ष ने भी अदालत में अपराध की गंभीरता और उसके सामाजिक प्रभाव का उल्लेख किया। वहीं, बचाव पक्ष ने पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर कम सजा की अपील की।
अदालत ने सुनाया फैसला
30 सितंबर को दोषी ठहराए जाने के बाद 14 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है।
इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड से जुड़े मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया लागू होती है।
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