रिलेशनशिप में क्या है 'Cushioning'? पार्टनर बना रहा है बैकअप, तो समझें रिश्तों के इस नए ट्रेंड का मतलब
कुशनिंग क्या है और क्या इसे रिश्ते में धोखा माना जाता है? जानें बैकअप पार्टनर बनाने की आदत, इसके मनोवैज्ञानिक कारण और रिश्ते पर पड़ने वाले असर.
आजकल सोशल मीडिया और रिश्तों की बातचीत में कई नए शब्द आ रहे हैं. इनमें से एक है 'कुशनिंग'. नाम सुनकर लगता है जैसे कोई नरम चीज हो, लेकिन असल में यह रिश्तों के लिए काफी नुकसानदेह आदत है. 'कुशनिंग' का मतलब है कि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी एक के साथ मोनोगैमस रिश्ते में होता है यानी सिर्फ एक पार्टनर के साथ, लेकिन फिर भी वह चुपके से दूसरे लोगों के साथ रोमांटिक बातचीत शुरू रखता है.
ये दूसरे लोग कोई साधारण दोस्त नहीं होते। बातचीत साफ तौर पर रोमांटिक अंदाज में होती है- जैसे फ्लर्ट करना, इमोशनल नजदीकी बढ़ाना, या डेटिंग ऐप पर एक्टिव रहना. लक्ष्य यह होता है कि अगर मौजूदा रिश्ता टूट जाए, तो तुरंत किसी नए व्यक्ति के पास जाने का विकल्प तैयार रहे. जैसे सोफे पर बैठते समय कुशन का सहारा लेना, वैसे ही यह एक इमोशनल सेफ्टी जाल है. यह ट्रेंड खास तौर पर उन रिश्तों में बढ़ता दिखता है जो पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहे होते हैं या धीरे-धीरे खत्म होने की तरफ बढ़ रहे होते हैं. व्यक्ति मौजूदा पार्टनर के साथ तो रहता है, लेकिन अंदर से हमेशा एक बैकअप प्लान बनाकर रखता है.
क्या कुशनिंग को धोखा माना जाए?
यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है. जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप चीटिंग को कैसे डिफाइंड करते हैं. मोनोगैमस रिश्ते में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के प्रति वफादार रहने का वादा करते हैं. 'कुशनिंग' में व्यक्ति जानबूझकर दूसरे लोगों के साथ रोमांटिक इक्वेशन बनाता है. वह मौजूदा रिश्ते को प्रायर्टी देते हुए भी लगातार नए विकल्प तलाशता रहता है. कुछ लोग फिजिकल छुआ-छूत या दोस्ती में नजदीकी को सामान्य मान सकते हैं. लेकिन कुशनिंग का मकसद साफ है—भविष्य के लिए सेफ्टी नेट तैयार करना. इसमें मौजूदा पार्टनर को असली वफादारी नहीं मिलती. व्यक्ति रिश्ते में रहता है, लेकिन उसका दिल और दिमाग आधे-अधूरे तौर पर बाहर के विकल्पों पर लगा रहता है. इसलिए ज्यादातर मामलों में इसे साफ तौर पर धोखा या विश्वासघात माना जा सकता है. जो वैरिएबल स्थिर रहता है वह व्यक्ति खुद और 'रिश्ते में होना' है, जबकि पार्टनर बदलने के लिए हमेशा तैयार रहता है.
