Super El Niño से दुनिया में मचेगी तबाही? भारत में 55 हजार मौतों का अनुमान, जानें कितना बड़ा है खतरा

सुपर अल नीनो को लेकर Climate Impact Lab के ट्रैकर ने मार्च 2027 तक दुनिया में 8.57 लाख अतिरिक्त गर्मी से जुड़ी मौतों का अनुमान जताया है। जानें भारत पर कितना खतरा है.

Super El Niño से दुनिया में मचेगी तबाही? भारत में 55 हजार मौतों का अनुमान, जानें कितना बड़ा है खतरा
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मौसम में हो रहे खतरनाक बदलावों और ग्लोबल वार्मिंग ने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस बीच, प्रशांत महासागर में सक्रिय हुए 'सुपर अल नीनो' (Super El Niño) ने वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की नींद उड़ा दी है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 'क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब' (Climate Impact Lab) ने एक ऐसा विशेष नक्शा और ट्रैकर जारी किया है, जो आने वाले महीनों में दुनिया के सामने खड़े होने वाले सबसे बड़े मानवीय संकट की ओर इशारा करता है.  इस रिपोर्ट और नक्शे के आंकड़े इतने डराने वाले हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम विनाशकारी साबित हो सकते हैं. 

क्या है 'अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर' और इसके डराने वाले आंकड़े?

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब द्वारा जारी किए गए 'अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर' के मुताबिक, इस खतरनाक मौसमी परिघटना के कारण दुनिया भर में भारी जनहानि होने की आशंका है। आंकड़े बताते हैं कि:

  • अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच: अकेले इस छह महीने की अवधि में 3,73,000 से ज्यादा अतिरिक्त लोगों की जान जा सकती है
  • जून 2026 से मार्च 2027 (कुल 9 महीने): इस पूरे चक्र के दौरान गर्मी से जुड़ी कुल 8,57,400 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान लगाया गया है. यह आंकड़ा वैज्ञानिकों द्वारा महज एक महीने पहले लगाए गए अनुमान से लगभग 3,50,000 ज्यादा है
  • यह रिसर्च दुनिया भर के लगभग 3,700 क्षेत्रों के आंकड़ों को कवर करती है और हर महीने अपडेट होकर अगले छह महीनों का पूर्वानुमान देती है. इसमें साल 1996 से 2005 के औसत हालातों की तुलना मौजूदा अल नीनो के प्रभावों से की गई है 

क्यों खतरनाक है यह 'सुपर अल नीनो'?

अल नीनो मूल रूप से समुद्र की सतह के तापमान में होने वाले बदलाव से जुड़ा है. मौजूदा स्थिति में पूर्वी-मध्य प्रशांत महासागर के 'नीनो 3.4' (Nino 3.4) क्षेत्र में पानी का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस (लगभग 6 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा) ऊपर पहुंच गया है. यह तापमान 18 से 24 अक्टूबर के सप्ताह के दौरान दर्ज किया गया था. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, नवंबर से जनवरी के बीच यह मौसमी घटना तापमान को सामान्य 'अल नीनो' के मुकाबले छह गुना से भी ज्यादा तेजी से बढ़ा सकती है. यही वजह है कि इसे 'सुपर अल नीनो' का नाम दिया गया है, जिसके प्रभाव पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं. 

किन देशों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा?

नक्शे के अनलाइसिज से पता चलता है कि इस आपदा का एक-तिहाई हिस्सा मुख्य रूप से विकासशील और घनी आबादी वाले देशों जैसे नाइजीरिया, भारत और ब्राजील पर पड़ेगा. गर्मी और लू (Heatwaves) के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देश इस प्रकार हैं:

  • नाइजीरिया: इस भीषण गर्मी का सबसे बुरा असर नाइजीरिया पर पड़ने की आशंका है, जहां इस दौरान गर्मी से जुड़ी 56,000 से अधिक मौतें हो सकती हैं
  • भारत: नाइजीरिया के ठीक बाद दूसरे नंबर पर भारत है. इस मॉडल के अनुसार, भारत में 55,200 लोगों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है
  • इंडोनेशिया: इस सूची में तीसरे स्थान पर इंडोनेशिया है, जहां 29,300 लोगों की जान जाने की आशंका है। यहां पहले ही जंगलों में भयानक आग लगने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं 
  • ब्राजील: दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील में 19,500 लोगों की जान जाने का खतरा जताया गया है
  • सूडान: अफ्रीकी देश सूडान में भी इस अवधि के दौरान 14,700 लोगों की मौत होने की आशंका है

दुनियाभर में दिख रहे हैं अल नीनो के शुरुआती और गंभीर प्रभाव

रिसर्चर्स का अनुमान है कि जून 2026 में इस चक्र के शुरू होने के बाद से अब तक 'अल नीनो' के कारण दुनिया भर में 484,500 अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं. इसके प्रभाव पहले ही कई रूपों में सामने आने लगे हैं:

  • भारत: अहम मानसूनी बारिश का अनियमित होना या समय पर न पहुंचना
  • इंडोनेशिया: जंगलों में भयंकर आग का सुलगना 
  • मध्य अमेरिका: गहराता सूखा 
  • अमेरिका: पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में अत्यधिक तूफान और भारी बारिश की आशंका, हालांकि न्यूयॉर्क जैसे क्षेत्रों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है 

जान बचाने के लिए समय रहते उठानी होंगी पुख्ता कदम

इस पूरी रिसर्च के महत्व को समझाते हुए क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन (Michael Greenstone) ने कहा, 'हमारा शोध नई पूर्वानुमान क्षमताओं का उपयोग करके दुनिया के सबसे जरूरी सवालों में से एक का जवाब देता है. अत्यधिक गर्मी के कारण आखिरकार कहां लोगों की जान जाने का सबसे ज्यादा खतरा है?.'

उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि अत्यधिक गर्मी के जानलेवा प्रभावों का पहले से सटीक अनुमान लगा पाना एक बहुत बड़ा कदम है. इसका मतलब यह है कि हम यह पहचान सकते हैं कि लोग कहां और किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा खतरे में हैं. इससे सरकारों और नीति-निर्माताओं को आपदा आने से पहले ही लोगों की जान बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का दुर्लभ अवसर मिल जाता है.