भूटान में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ का खतरा, असम और बंगाल के 6 जिलों में हाई अलर्ट
भूटान की सिंटाफू झील में GLOF की घटना के बाद असम और पश्चिम बंगाल के 6 जिलों में अलर्ट जारी, जानें किन इलाकों पर मंडरा रहा है बाढ़ का खतरा.
पूर्वी हिमालय की गोद में बसे भूटान से एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आई है. भूटान के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके में स्थित एक बड़ी ग्लेशियल झील (Glacial Lake Outburst Flood - GLOF) के अचानक फटने से निचले इलाकों में भारी तबाही की आशंका बढ़ गई है. इस घटना के बाद भारत के पड़ोसी राज्यों- असम और पश्चिम बंगाल—के निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार नीचे की ओर बहने वाली नदियों पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, जिनमें भारी मात्रा में पानी और मलबा तेज़ी से बहकर आ रहा है.
कहां और कैसे हुई यह घटना?
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह खतरनाक विस्फोट भूटान के गासा क्षेत्र के मोचू सब-बेसिन में स्थित 'सिंटाफू झील' (Cintafu Lake) में हुआ है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं. इसी वजह से बर्फ से बनी मोरेन झीलों (Moraine-dammed lakes) में अस्थिरता आ गई, जिसके चलते झील के तटबंध में दरार आ गई और यह बड़ा विस्फोट हुआ. इस घटना के कारण पानी और मलबे का सैलाब सीधे भूटान से निकलकर भारत की ब्रह्मपुत्र घाटी और पश्चिम बंगाल के उत्तरी दुआर्स क्षेत्र से गुजरने वाली नदियों में प्रवेश कर गया है.
इन जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा
अचानक जलस्तर बढ़ने से भूटान से भारत में प्रवेश करने वाली नदियों के किनारे बसे गांवों, कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भारी खतरा पैदा हो गया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है- असम के प्रभावित जिले: कोकराझार, बक्सा, चिरांग और धुबरी, पश्चिम बंगाल के प्रभावित जिले: जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार.
???? BREAKING: भूटान में फूटा ग्लेशियल लेक, भारत में भयंकर बाढ़ का हाई अलर्ट! ???? भूटान के गासा में शिंताफू झील फटने (GLOF) से लाखों टन पानी और मलबा मो चू नदी के रास्ते भारत की 'संकोश नदी' की तरफ बढ़ रहा है। ???? असर और अलर्ट: • पश्चिम बंगाल: अलीपुरदुआर, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार में रेड अलर्ट। • असम: कोकराझार और धुबरी जिलों में बाढ़ का भारी खतरा। • प्रशासनिक एक्शन: NDRF तैनात, नदी किनारे के गांवों को तुरंत खाली कराया जा रहा है। उत्तर बंगाल और असम के लोग कृपया सुरक्षित स्थानों पर जाएं और अफवाहों से बचें। ???? #Bhutan #GlacialLakeOutburst #NorthBengal #SankoshRiver
— Om Prakash Rastogi (@OmprakashRast13) October 30, 2026
प्रशासन की मुस्तैदी और एहतियाती कदम
किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गए हैं. नदी के जलस्तर और उसके बहाव (Discharge) पर चौबीसों घंटे नज़र रखने के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाए गए हैं. कमजोर नदी के किनारों पर राहत और बचाव टीमों को तैनात कर दिया गया है. जिला प्रशासन ने नदियों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है. लोगों को नदी के किनारों से दूर रहने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने (इवैक्युएशन) के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है.
हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे खतरे
यह घटना एक बार फिर पूर्वी हिमालय में बढ़ते पर्यावरणीय संकट को उजागर करती है. बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के पीछे हटने और नई विशाल झीलें बनने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है. GLOF (ग्लेशियल लेक आउटभर्स्ट फ्लड) की सबसे डरावनी बात यह होती है कि यह कुछ ही घंटों में भारी मात्रा में पानी छोड़ देते हैं, जिससे पारंपरिक वार्निंग सिस्टम के एक्टिव होने से पहले ही निचले इलाकों में तबाही आ सकती है.
खास बात यह है कि ऐसा ही एक भयानक अलर्ट अगस्त 2026 में भी देखने को मिला था, जब नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. उस आपदा में भी ऊंचाई वाले ढलानों की दरारों और झीलों में उछाल के कारण भारी मलबा भारत की तरफ बहकर आया था, जिससे सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ था.
