मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा, एमपी के हर गांव तक पहुंचेगी बस,कम होगा कार्बन उत्सर्जन
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुरू के साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू हुई इस सेवा में निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी को डिजिटल टिकटिंग, यात्री सुरक्षा और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इसके माध्यम से यात्रियों को किफायती सफर, बस ऑपरेटरों को बेहतर संचालन सुविधाएं और सरकार को परिवहन सेवाओं की प्रभावी निगरानी उपलब्ध कराने पर कार्य किया जा रहा है।
बस सेवाओं को जोड़ने की योजना
मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) इस व्यवस्था के क्रियान्वयन और विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है। प्रदेश सरकार के इस परिवहन उपक्रम के माध्यम से शहरी, ग्रामीण और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को जोड़ने की योजना है। इसके तहत बस नेटवर्क के विस्तार के साथ आधुनिक बस डिपो, टर्मिनल, अंतरराज्यीय बस अड्डे सहित विभिन्न परिवहन साधनों को जोड़ने वाले केंद्र और इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विजन 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को बेहतर बनाने और अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश मोबिलिटी विजन 2030 में प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं, जिनमें 15 हजार से अधिक सार्वजनिक बसें, 5 करोड़ से अधिक डिजिटल टिकट, 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा का संपर्क, प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा, 80 से अधिक डिपो और टर्मिनल, ई-बसों से सालाना 70 हजार टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी शामिल है। इन लक्ष्यों की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी यानी पीपीपी को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग के साथ ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जो यात्रियों की जरूरतें पूरी करे और आर्थिक रूप से लंबे समय तक चल सके।
तकनीक से आसान और सुरक्षित होगी यात्रियों की यात्रा
इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से बस संचालन, टिकटिंग और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को एक व्यवस्था पर लाने का कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक आधारित इस व्यवस्था से बस सेवाओं की निगरानी, संचालन में पारदर्शिता और यात्रियों की सुविधा बेहतर होगी।
सुविधाओं का दायरा बढ़ने के साथ विभाग और ऑपरेटरों को संचालन की स्थिति समझने के लिए बेहतर आंकड़े मिलेंगे। यात्रियों की प्रतिक्रिया और मांग के अनुसार सेवाओं में सुधार करना भी आसान होगा।
