‘मैं गर्व से कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं’: जामिया छात्रों के समर्थन में Naseeruddin Shah का बयान, बीजेपी पर लगाए आरोप

नसीरुद्दीन शाह ने जामिया के छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार की आलोचना की. जानें 'दिमागी नक्सल' पिन और छात्र संघ चुनाव विवाद से जुड़ी पूरी खबर.

‘मैं गर्व से कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं’: जामिया छात्रों के समर्थन में Naseeruddin Shah का बयान, बीजेपी पर लगाए आरोप
Image Credit: IMDB

बॉलीवुड स्टार नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं. सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के छात्रों का समर्थन करने के बाद, अब उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का समर्थन किया है, जो अपनी छात्र यूनियन (Student Union) को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 

बुधवार को सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में, कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित इस दिग्गज एक्टर ने जामिया के छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार के रुख की कड़ी आलोचना की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और 'युवाओं की हिम्मत को तोड़ने' का गंभीर आरोप लगाया. 

'दिमागी नक्सल' पिन पहनकर दिया कड़ा संदेश

वीडियो में नसीरुद्दीन शाह कैमरे के सामने एक खास पिन पहने हुए नजर आए, जिस पर 'दिमागी नक्सल' लिखा हुआ था. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल की शुरुआत में एक भाषण के दौरान सरकार की आलोचना करने वालों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था. इस पर तंज कसते हुए अभिनेता ने वीडियो में हिंदी में कहा, 'मैं गर्व से कहता हूं कि मैं दिमागी नक्सल हूं. मुझे नहीं पता कि चौकीदारों ने मेरे जैसे लोगों को और क्या-क्या निकनेम दिए हैं देशद्रोही, 'टुकड़े-टुकड़े' गैंग, और पता नहीं क्या-क्या.'

फेसबुक पर अपलोड किए गए इस वीडियो में उन्होंने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए कहा, 'मैं इस सरकार से पूछना चाहता हूं कि आप हमारे देश के युवाओं की हिम्मत तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और हमारी डेमोक्रेसी को खतरे में डालने के लिए और क्या-क्या करेंगे? आप कितना करेंगे? आप कितनी दूर जाएंगे?.' 76 वर्षीय एक्टर इससे पहले भी लगातार वीडियो शेयर कर छात्र-हित के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते रहे हैं. जुलाई के महीने में उन्होंने NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर भी सरकार की तीखी आलोचना की थी. 

शायरी और कविताओं के जरिए बयां किया दर्द

वीडियो के अंत में नसीरुद्दीन शाह ने ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कविताओं का सहारा लिया. उन्होंने युवा कवि आमिर अज़ीज़ की मशहूर कविता की पंक्तियों को याद करते हुए कहा- 'पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, फिर सत्यजीत रे फ़िल्म इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिलिया. स्टूडेंट्स पर जो ज़ुल्म हो रहे हैं, उन्हें याद रखा जाएगा....सब याद रखा जाएगा.' इसके साथ ही, उन्होंने बिस्मिल अज़ीमाबादी की अमर रचना 'सरफ़रोशी की तमन्ना' की प्रसिद्ध लाइन—'देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है' सुनाकर अपना विरोध दर्ज कराया. 

क्या है जामिया मिलिया इस्लामिया का पूरा विवाद?

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र लंबे समय से अपनी यूनियन के चुनावों के लिए एक पक्की तारीख तय करने और स्टूडेंट यूनियन के संविधान को आधिकारिक मंजूरी देने के लिए स्पष्ट समयसीमा की मांग कर रहे हैं. गौरतलब है कि इस विश्वविद्यालय में साल 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं. इस विरोध प्रदर्शन का सिलसिला सोमवार को अपने 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छात्रों के बढ़ते दबाव को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनकी एक मुख्य मांग मान ली और घोषणा की कि लगभग दो दशकों 20 साल के लंबे अंतराल के बाद कैंपस में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव फिर से बहाल किए जाएंगे. हालांकि, इस घोषणा से भी छात्रों और प्रशासन के बीच का डेडलॉक  पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने चुनावों के आयोजन के लिए कोई निश्चित या पक्की समयसीमा जारी नहीं की है, जिसके चलते उनका विरोध-प्रदर्शन अभी भी जारी है.