ज़्यादा खर्च वाले प्रस्ताव की जांच होगी। मध्यप्रदेश बजट 2027-28 पर सख्ती

वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। वित्त विभाग ने सभी विभागों के साथ पहले दौर की चर्चा पूरी कर ली है। अब दूसरे दौर में यह देखा जाएगा कि किस विभाग को कितने पैसे की जरूरत है।

ज़्यादा खर्च वाले प्रस्ताव की जांच होगी। मध्यप्रदेश बजट 2027-28 पर सख्ती

विभागों की मांग और वास्तविक जरूरत का मिलान

पहले चरण में वित्त विभाग ने अलग-अलग विभागों के उप सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं। इनमें विभागों की योजनाओं, निर्माण कार्यों और दूसरे खर्चों के लिए मांगे गए बजट पर चर्चा हुई थी। अब दूसरे चरण में उन प्रस्तावों की दोबारा जांच होगी, जिन पर और जानकारी की जरूरत है। खासकर ज्यादा पैसा मांगने वाले प्रस्तावों पर ध्यान दिया जाएगा। वित्त विभाग यह देखेगा कि किस योजना पर कितना खर्च होगा और वह कितनी जरूरी है। इसके बाद तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी कि किस विभाग को कितनी राशि दी जाए।

खर्च नहीं हुई राशि भी बजट प्रबंधन का अहम पहलू

सरकार के बजट में सिर्फ विभागों को नया पैसा देना ही जरूरी नहीं है। यह भी देखा जाएगा कि विभागों ने पहले मिले बजट में से कितना पैसा खर्च किया और कितना बचा है। इसके अलावा कौन-से काम देर से शुरू हुए और किस विभाग ने साल के आखिर में कितनी राशि वापस की, इसका पता खर्च के रिकॉर्ड से चलेगा। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि किस विभाग ने कितना बजट खर्च किया और कितनी राशि बची है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि किसी खास विभाग ने कम पैसा खर्च किया है या उसका बजट प्रबंधन कमजोर रहा है।

चालू वित्त वर्ष के अनुपूरक बजट की तैयारी

वित्त विभाग ने साल 2026-27 के दूसरे अनुपूरक बजट के लिए भी सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे हैं। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को 22 अक्टूबर 2026 तक अपने प्रस्ताव ऑनलाइन भेजने होंगे। इसके लिए IFMIS पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। दरअसल, अनुपूरक बजट के जरिए चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त खर्च के लिए पैसा मांगा जाता है। विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से प्रस्ताव भेज सकेंगे। इसके बाद बजट की तय प्रक्रिया के अनुसार जांच होगी और मंजूरी दी जाएगी।