बिन पानी हैदराबाद सून, अक्टूबर में ही 233% बढ़ी पानी के टैंकरों की मांग
मानसून खत्म होने के महज 17 दिन बाद ही हैदराबाद में पानी की किल्लत बढ़ गई है। अक्टूबर में पानी के टैंकरों की मांग पिछले साल के मुकाबले 233 फीसदी बढ़ गई। इस महीने अब तक 62,565 टैंकर बुक हुए हैं। सिंगूर जलाशय में 17 अक्टूबर तक सिर्फ 11 फीसदी पानी बचा था. बासर यूनिवर्सिटी में पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया गया है। जल बोर्ड ने लोगों से पानी की खपत 20 फीसदी घटाने की अपील की है।
पानी के लिए हैदराबाद में हाहाकार
हैदराबाद में अभी गर्मियों का मौसम आया भी नहीं है और पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। मानसून खत्म हुए महज 17 दिन बीते हैं लेकिन शहर में पानी के टैंकरों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आमतौर पर मार्च और अप्रैल में टैंकरों की बुकिंग तेजी पकड़ती थी। इस बार अक्टूबर में ही हर दिन करीब 8 हजार टैंकर बुक हो रहे हैं। जल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक इस महीने अब तक 62,565 टैंकरों की बुकिंग हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 18,806 था। यानी मांग में 233 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आने वाले महीनों में शहर की प्यास कैसे बुझेगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार पानी की कमी का असर अब घरों से लेकर संस्थानों तक दिखने लगा है। तेलंगाना के बासर स्थित यूनिवर्सिटी में पानी की किल्लत के चलते सोमवार से ऑनलाइन क्लास शुरू करने का फैसला लिया गया है। यहां रोजाना करीब 25 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है जबकि आपूर्ति सिर्फ 10 लाख लीटर हो पा रही है। दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में अपार्टमेंट और आईटी दफ्तर टैंकरों पर निर्भर होते जा रहे हैं. करीब 20 हजार बोरवेल सूखने की जानकारी भी सामने आई है। कम बारिश और तेजी से गिरते भूजल स्तर ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। अब जल बोर्ड ने लोगों से पानी की खपत 20 फीसदी तक कम करने की अपील की है।
हैदराबाद के तेजी से विकसित होते रिहायशी इलाकों में पानी की किल्लत ज्यादा महसूस की जा रही है। बोडुप्पल में पिछले साल के मुकाबले टैंकरों की मांग 22 गुना तक बढ़ने की जानकारी दी गई है। अपार्टमेंट और दफ्तरों में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैंv जल बोर्ड के लिए बढ़ती मांग के साथ आपूर्ति बनाए रखना चुनौती बन गया है। हालात को देखते हुए लोगों से पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने को कहा गया है।
