ऐसा क्या बोल गए थे अमित शाह को राहुल गांधी? 8 साल बाद हुए मानहानि मामले से बरी; जानें पूरा विववाद

Rahul Gandhi Defamation Case: अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े 8 साल पुराने मानहानि मामले में सुल्तानपुर कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी किया. जानें पूरा विवाद.

ऐसा क्या बोल गए थे अमित शाह को राहुल गांधी? 8 साल बाद हुए मानहानि मामले से बरी; जानें पूरा विववाद
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Rahul Gandhi Defamation Case: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई एक पुरानी टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है.  सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी (दोषमुक्त) कर दिया है. पिछले करीब 8 वर्षों से अदालत में चल रहे इस बहुचर्चित मुकदमे में कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. 

8 साल पुराना था पूरा मामला

यह पूरा कानूनी विवाद राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर था. इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया था, जिसकी सुनवाई पिछले लगभग आठ सालों से सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत में चल रही थी. आज सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में राहुल गांधी को दोषमुक्त करार दे दिया. 

कांग्रेस ने जताई खुशी, प्रमोद तिवारी बोले- 'सत्यमेव जयते'

अदालत के फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल देखने को मिला. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद प्रमोद तिवारी ने कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए तीखे शब्दों में भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'अभी-अभी सुल्तानपुर की अदालत ने न्याय के योद्धा और संघर्ष के लिए तत्पर देश के इस महान नायक को दोषमुक्त कर दिया है. अदालत ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि राहुल गांधी के खिलाफ कोई भी आरोप सिद्ध नहीं होता है. मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि सत्यमेव जयते. भाजपा सरकार में बैठे कुछ लोगों ने राहुल गांधी को मानसिक रूप से विचलित करने और परेशान करने की पूरी कोशिश की, लेकिन यह इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का खून है, जो हर हाल में संघर्ष के रास्ते पर चलता है और अन्याय के आगे कभी नहीं झुकता.'

जगदंबिका पाल बोले- "कोर्ट ने बरी किया, पर जनता माफ नहीं करेगी"

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस अदालत के फैसले के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला है. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी के बरी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत भले ही अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया हो, लेकिन देश की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी. जगदंबिका पाल ने कहा, 'राहुल गांधी को भले ही कोर्ट से राहत मिल गई हो, लेकिन देश की जनता उन्हें कभी दोषमुक्त नहीं मानेगी. आज संसद के अंदर ब्रिक्स (BRICS) का महत्वपूर्ण संसदीय सम्मेलन चल रहा है और राहुल गांधी देश के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सदन में उपस्थित नहीं हुए. राहुल गांधी पहले प्रधानमंत्री और उनके परिजनों पर अमर्यादित टिप्पणियां करते थे, और अब तो उनकी पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेता और अध्यक्ष भी उसी राह पर चल पड़े हैं.'

मामला क्या था और शुरुआत कैसे हुई?

  • यह पूरा 8 साल पुराना मामला साल 2018 का है. आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी, राहुल गांधी ने क्या बयान दिया था और मामला क्या था: 
  • मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक चुनावी रैली/कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसी कार्यक्रम में राहुल गांधी ने तत्कालीन बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष (और वर्तमान केंद्रीय गृहमंत्री) अमित शाह के खिलाफ एक बयान दिया था.
  • इस बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के तत्कालीन बीजेपी जिला उपाध्यक्ष और स्थानीय नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि (Defamation) का परिवाद (शिकायत) दर्ज कराया था.
  • यह मामला लगभग 8 साल तक अदालत में चला. फरवरी 2024 में राहुल गांधी खुद सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए थे और उन्होंने इस मामले में जमानत ली थी. लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अब जाकर इस पर अपना फैसला सुनाया है. 

राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर क्या कहा था?

इस मामले की शिकायत करने वाले बीजेपी नेता विजय मिश्रा और उनके वकीलों के अनुसार, बेंगलुरु की उस रैली में राहुल गांधी ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए 'हत्यारे' होने का आरोप लगाया था. शिकायतकर्ता का कहना था कि राहुल गांधी ने एक राष्ट्रीय पार्टी के शीर्ष नेता और तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ अमर्यादित और झूठी टिप्पणी की थी, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं आहत हुई हैं. वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष (राहुल गांधी के वकीलों) का यह तर्क रहा कि राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था और उनका उद्देश्य मानहानि करना नहीं था, बल्कि यह एक राजनीतिक बयान था. जिसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुकदमे में बदला गया. अब सुल्तानपुर कोर्ट ने साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर राहुल गांधी को इस मामले में पूरी तरह बरी कर दिया है.