Census 2027: 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, जानें किन राज्यों में टली प्रक्रिया और कैसे होगी ऑनलाइन गिनती?

भारत में जनगणना 2027 की शुरुआत 25 जनवरी से होगी. जानें सेल्फ एन्यूमरेशन की तारीख, ₹11,718 करोड़ का बजट और किन राज्यों में बदला शेड्यूल.

Census 2027: 25 जनवरी से शुरू होगी जनगणना, जानें किन राज्यों में टली प्रक्रिया और कैसे होगी ऑनलाइन गिनती?
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भारत में एक दशक से अधिक लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जनगणना की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. देश के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, देश की अगली जनगणना 25 जनवरी 2027 से शुरू होने जा रही है. कोरोना महामारी और अन्य कारणों से टलती रही यह प्रक्रिया अब देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच पूरी की जाएगी. इसे देश के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक जनगणना प्रक्रिया माना जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 11,718 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है. 

दो चरणों में पूरी होगी पूरी प्रक्रिया

आजादी के बाद देश की यह 8वीं जनगणना होगी, जिसे बेहद व्यवस्थित तरीके से दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा:

पहला चरण: इस चरण में देश भर में मकानों की सूची तैयार की जाएगी और आवास से जुड़ी बुनियादी जानकारियां जुटाई जाएंगी 

दूसरा चरण: इस चरण में घर-घर जाकर वास्तविक जनसंख्या की गिनती की जाएगी 

इसके अलावा, जनगणना के लिए रिफ्रेंस डेट 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे तय की गई है. इसका सीधा मतलब यह है कि इसी तारीख और समय को आधार मानकर देश की कुल आबादी के अंतिम आंकड़े दर्ज किए जाएंगे. जनगणना के बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक आंकड़ों के रिवीजन का दौर भी चलाया जाएगा. 

सेल्फ-एन्यूमरेशन की आधुनिक सुविधा

इस बार की जनगणना में तकनीक और नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है. सरकार की ओर से लोगों को खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराने का विकल्प भी दिया जाएगा. यह सेल्फ-एन्यूमरेशन सुविधा 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक उपलब्ध रहेगी. इस समयावधि के तुरंत बाद गणनाकारों द्वारा घर-घर जाकर गिनती का दौर शुरू किया जाएगा. 

किन राज्यों और इलाकों में फिलहाल टली है जनगणना?

अधुसूचना के मुताबिक, कुछ चुनिंदा राज्यों और भौगोलिक रूप से संवेदनशील इलाकों में इस तय समय पर जनगणना नहीं होगी:

विधानसभा चुनाव वाले राज्य: जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां फिलहाल 25 जनवरी से 28 फरवरी के बीच यह प्रक्रिया स्थगित रहेगी. इन राज्यों में मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और लद्दाख शामिल हैं.

मणिपुर की विशेष स्थिति: मणिपुर में स्थिति और प्रशासनिक व्यस्तता को देखते हुए मकानों की सूची तैयार करने के कार्य सहित पूरी जनगणना प्रक्रिया को अगले आदेश तक के लिए टाल दिया गया है. 

बर्फबारी से प्रभावित इलाके: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के उन दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों को भी इस चरण से बाहर रखा गया है, जहां अत्यधिक बर्फबारी के कारण सर्दियों के दौरान सामान्य समय पर जनगणना करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता है. 

2011 के बाद क्यों हो रही है इतनी देरी?

नियमों के मुताबिक भारत में हर 10 साल पर जनगणना होती है. इस लिहाज से अगली जनगणना साल 2021 में होनी तय थी. हालांकि, वैश्विक स्तर पर फैली कोरोना महामारी (Covid-19) के चलते इस पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए टालना पड़ा था. अब लगभग 16 साल के लंबे अंतराल के बाद (आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी), देश को अपनी वास्तविक और मौजूदा आबादी के नए आंकड़े मिलने जा रहे हैं.

2011 की जनगणना पर एक नजर

आखरी बार हुई 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि उस समय भारत की कुल आबादी 121 करोड़ दर्ज की गई थी. उस आबादी में:

  • पुरुषों की संख्या: 62.32 करोड़

  • महिलाओं की संख्या: 58.75 करोड़

  • कुल परिवारों की संख्या: 24.95 करोड़ थी 

क्यों बेहद खास है यह जनगणना?

लगभग डेढ़ दशक के बाद होने जा रही यह नई जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य की दिशा तय करने का एक मजबूत आधार है. इससे मिलने वाले नए जनसांख्यिकीय (Demographic) आंकड़ों का सीधा इस्तेमाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, नीतियों, आधारभूत विकास कार्यों और राज्यों के बीच संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे से जुड़े बड़े फैसलों में किया जाएगा.