Manisha Bhanwala ने रचा इतिहास, वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया. जानें फाइनल में अमेरिकी पहलवान को हराकर उन्होंने कैसे हासिल की ऐतिहासिक जीत.

Manisha Bhanwala ने रचा इतिहास, वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं
Image From Instagram: @manisha_bhanwala17

भारतीय कुश्ती इतिहास में शुक्रवार का दिन हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया है. हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली 29 वर्षीय अनुभवी महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने अस्ताना में चल रही वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है. इसके साथ ही वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गई हैं. हालांकि, यह मुकाबला 59 किलोग्राम गैर-ओलंपिक भार वर्ग (नॉन-ओलंपिक वेट क्लास) में था, लेकिन इसके बावजूद यह जीत भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है, क्योंकि इससे पहले देश की किसी भी महिला पहलवान ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल नहीं किया था. 

रोमांचक फाइनल में अमेरिका की धुरंधर को दी मात

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा, जहां मनीषा का सामना अमेरिका की मजबूत पहलवान और पैन अमेरिकन चैंपियन ए. एलिजाबेथ नेटे से था.  मुकाबले की शुरुआत में अमेरिकी पहलवान हावी नजर आईं और पहले पीरियड के खत्म होने तक मनीषा 1-6 से पिछड़ रही थीं. लेकिन एक अनुभवी खिलाड़ी की असली पहचान मुश्किल समय में ही होती है। मनीषा ने हार मानने के बजाय दूसरे पीरियड में गजब का मानसिक और शारीरिक संतुलन दिखाया। उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए एक के बाद एक कई प्रभावी अटैक किए और अमेरिकी पहलवान को पूरी तरह दबाव में ला दिया. शानदार रणनीति और अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मनीषा ने यह मुकाबला 8-6 के अंतर से अपने नाम कर लिया और पोडियम के सबसे ऊंचे स्थान पर तिरंगा फहरा दिया.

शानदार सफर और फाइनल तक का रास्ता

29 साल की मनीषा का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. अपने इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान उन्होंने एक से बढ़कर एक दिग्गजों को धूल चटाई. फाइनल में पहुंचने से पहले उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को शिकस्त दी, और मैट पर अपनी बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए उन्हें चित कर दिया. इसके बाद उन्होंने मंगोलिया की मजबूत पहलवान बोलोरतुया खुरेलखु और कजाकिस्तान की अल्टीन शागायेवा को पटखनी देकर खिताबी मुकाबले में अपनी धाक जमाई. 

एशियन गेम्स की निराशा को पीछे छोड़ हासिल की सफलता

मनीषा के लिए यह शानदार जीत इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि यह हाल ही में समाप्त हुए एशियन गेम्स के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आई है. एशियन गेम्स में भारतीय कुश्ती दल उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया था और अंतिम पंघाल (53 किग्रा) को छोड़कर कोई भी पहलवान मेडल नहीं जीत सका था. खास बात यह है कि एशियन गेम्स के दौरान मनीषा ने 57 किलोग्राम (जो कि एक ओलंपिक वेट क्लास है) में हिस्सा लिया था, जहां वह क्वार्टर फाइनल में जापान की दिग्गज अकारी फुजिनामी से हार गई थी. हालांकि, इस बार वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उन्होंने 59 किलोग्राम भार वर्ग में उतरने का कड़ा और सही फैसला लिया, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी. अपने करियर में 57 किग्रा से लेकर 65 किग्रा तक अलग-अलग वजन श्रेणियों में खेल चुकीं मनीषा ने अपने लंबे अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया और अपने तीसरे प्रयास में आखिरकार वह कर दिखाया जिसका सपना हर खिलाड़ी देखता है. 

भारतीय महिला पहलवानों का शानदार प्रदर्शन

मनीषा की इस ऐतिहासिक सफलता के अलावा, अस्ताना में भारत का पूरा महिला कुश्ती अभियान बेहद शानदार रहा. देश की दो अन्य उभरती हुई पहलवानों—नीलम सिरोही (50 किग्रा) और काजल धोचक (76 किग्रा) ने ओलंपिक भार वर्ग के फाइनल तक का सफर तय किया. हालांकि, खिताबी मुकाबलों में कड़े संघर्ष के बाद उन्हें रजत पदक (सिल्वर मेडल) से ही संतोष करना पड़ा, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भी भविष्य के लिए बहुत उम्मीदें जगाने वाला रहा. 

भारतीय कुश्ती में महिला वर्ग का बढ़ता दबदबा

अगर हम इतिहास पर नजर डालें, तो भारत के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना या मेडल जीतना हमेशा से एक बड़ी उपलब्धि रहा है. मनीषा की इस सफलता से पहले, स्टार पहलवान अंशु मलिक वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली अकेली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने 2021 में 57 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था. इसके अलावा, भारत की दो सबसे प्रतिष्ठित और काबिल पहलवानों- विनेश फोगट और अंतिम पंघाल ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो-दो ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किए हैं, जिसमें अंतिम पंघाल ने ओलंपिक वेट कैटेगरी में भी यह कमाल दिखाया है.

पुरुषों में सुशील कुमार की ऐतिहासिक यादें

अगर हम पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती की बात करें, तो दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार आज भी भारत के इकलौते पुरुष वर्ल्ड चैंपियन बने हुए हैं. उन्होंने साल 2010 में मॉस्को में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप के 66 किलोग्राम भार वर्ग में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था. उनके अलावा बजरंग पुनिया भी 2018 की बुडापेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे थे, जहां उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था.