'लड़कियों की पढ़ाई रोकने में बुराई नहीं'! Zakir Naik बयान पर मचा बवाल, जानें पूरा मामला

जाकिर नाइक ने अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान की पाबंदी का बचाव किया. मलाला के पिता समेत अफगान हस्तियों ने बयान की आलोचना की.

'लड़कियों की पढ़ाई रोकने में बुराई नहीं'! Zakir Naik बयान पर मचा बवाल, जानें पूरा मामला
Image From X Handle: @diganta_guha

हाल ही में विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक (Zakir Naik) ने एक बार फिर अपने बयानों के चलते सुर्खियां बटोरी हैं. इस बार उसने अफगानिस्तान में तालिबान शासन द्वारा लड़कियों की शिक्षा पर लगाई गई अमानवीय पाबंदियों का खुलकर बचाव किया है. नाइक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया में अफगान महिलाओं और बच्चियों के मानवाधिकारों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है. 

क्या कहा जाकिर नाइक ने?

सामने आए एक वीडियो में जाकिर नाइक ने दावा किया है कि उसने तालिबान के प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है. उसका कहना है कि मीडिया में आने वाली हर रिपोर्ट सच नहीं होती. नाइक के मुताबिक, तालिबान का यह फैसला परमानेंट नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षा कारणों और महिला शिक्षकों की भारी कमी के चलते फिलहाल 'टाला' गया है. 

नाइक ने अपनी सफाई में यह भी तर्क दिया कि तालिबान बच्चियों को छठी कक्षा तक पढ़ने की अनुमति तो दे रहा है, लेकिन उसके आगे की पढ़ाई के लिए वह एक 'सुरक्षित माहौल' और पर्याप्त महिला शिक्षकों के मिलने का इंतजार कर रहा है. उसने अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा कि जब तक पढ़ाई के लिए सही माहौल और शिक्षक नहीं मिल जाते, तब तक शिक्षा को अस्थायी रूप से रोकने में कोई बुराई नहीं है. इसके अलावा, उसने यह दावा भी किया कि अफगानिस्तान में महिलाएं अभी भी शरिया, अरबी और कुरान जैसे इस्लामी विषयों में मास्टर डिग्री और पीएचडी तक की पढ़ाई कर सकती हैं. 

मलाला के पिता और अफगान नागरिकों का कड़ा विरोध

जाकिर नाइक के इस बयान के बाद दुनिया भर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. पाकिस्तान की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के पिता, जियाउद्दीन यूसुफजई ने नाइक के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया है. इसके साथ ही अफगानिस्तान से ताल्लुक रखने वाली कई प्रमुख हस्तियों ने भी नाइक की जमकर आलोचना की है. बेल्जियम में रह रहे अफगानिस्तान के पूर्व सुरक्षा बल सदस्य अजीम शिनवारी ने तीखा सवाल उठाया कि अगर आप लड़कियों को पढ़ने ही नहीं देंगे, तो भविष्य में महिला शिक्षक आखिर कहां से आएंगी? उन्होंने नाइक से उनके दावों के समर्थन में सबूत भी मांगे. अफगानिस्तान की निर्वासित संसद की सदस्य मरियम सोलैमंखिल ने नाइक के तर्कों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह कितनी विडंबना है कि तालिबान ने खुद उन हजारों महिला शिक्षकों को काम करने से रोक रखा है, और अब उन्हीं के उपलब्ध होने का इंतजार करने का ढोंग किया जा रहा है. 

अफगानिस्तान में शिक्षा का काला सच 

यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा इस साल अगस्त में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में आज के समय में 26 लाख से अधिक लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं 

15 अगस्त 2021: तालिबान के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से ही अफगान महिलाओं की जिंदगी पर पाबंदियों का दौर शुरू हो गया 

सितंबर 2021: तालिबान सरकार ने ऐलान किया कि लड़कियां छठी कक्षा के आगे स्कूल नहीं जा सकेंगी 

दिसंबर 2022: महिलाओं के विश्वविद्यालयों में प्रवेश पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई 

दिसंबर 2024: पाबंदियों का दायरा बढ़ाते हुए महिलाओं के लिए नर्सिंग और मिडवाइफरी समेत सभी मेडिकल ट्रेनिंग संस्थानों में पढ़ाई पर भी बैन लगा दिया गया 

इन तमाम कड़े प्रतिबंधों के बाद, वर्तमान में अफगानिस्तान दुनिया का इकलौता ऐसा देश बन चुका है, जहां बच्चियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा के सभी रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं. ऐसे दौर में जाकिर नाइक जैसे उपदेशकों द्वारा तालिबान के इन फैसलों को सही ठहराना मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय बना हुआ है.