भारतीय परिवारों की बदली खर्च करने की आदत! खाने पर सिर्फ 33% खर्च, जानें कहां जा रहा बाकी पैसा

SBI रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवार अब खाने पर सिर्फ 32.82% खर्च कर रहे हैं. जानें ग्रामीण और शहरी भारत में खर्च का बदलता पैटर्न.

भारतीय परिवारों की बदली खर्च करने की आदत! खाने पर सिर्फ 33% खर्च, जानें कहां जा रहा बाकी पैसा
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भारत में आज घरों के बजट और खर्च करने के तरीकों में एक दिलचस्प और गहरा बदलाव देखने को मिल रहा है. पारंपरिक रूप से जहां लोग अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ खाने-पीने और बुनियादी जरूरतों पर खर्च करते थे, वहीं अब यह दायरा लगातार बदल रहा है. एसबीआई (SBI) रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट 'इंडियाज़ कंजम्पशन जर्नी' से यह खुलासा हुआ है कि अब भारतीय परिवार अपनी बेसिक जरूरतों से कहीं आगे निकलकर अपने कंजम्पशन बास्केट (खर्च के दायरे) को विविधता दे रहे हैं. यह व्यापक विश्लेषण नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे (HCES) 2023-24 पर आधारित है, जिसमें देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों के 2,61,953 से अधिक घरों के विस्तृत डेटा को शामिल किया गया है. 

खाने से आगे बढ़कर सेवाओं और नॉन-फूड प्रोडक्ट्स पर बढ़ा फोकस

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में कुल घरेलू खर्च का लगभग 32.82 प्रतिशत हिस्सा ही फूड प्रोडक्ट्स पर खर्च हो रहा है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा यानी करीब 67 प्रतिशत हिस्सा नॉन-फूड प्रोडक्ट्स और विभिन्न सर्विसेज पर खर्च किया जा रहा है. यह आंकड़ा इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय कंज्यूमर्स की प्राथमिकताएं अब बदल रही हैं और वे अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. 

थाली में बढ़ा प्रोटीन, फल और सब्जियों का क्रेज  

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, देश के कंज्यूमर्स के बीच अब नुट्रिशयस डाइट, खासकर प्रोटीन युक्त फूड प्रोडक्ट, ताजे फलों और हरी सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह पॉजिटिव ट्रेंड देश के अलग-अलग इनकम ग्रुप्स में देखा गया है, हालांकि अलग-अलग राज्यों के बीच खर्च के स्तर में अभी भी काफी डिफरेंस बनी हुई है:

टॉप राज्य: प्रोटीन वाले फूड्स प्रोडक्ट्स पर औसत घरेलू खर्च के मामले में सिक्किम सबसे आगे रहा, जहां औसत खर्च ₹1,776 दर्ज किया गया. इसके बाद गोवा (₹1,711) दूसरे और हरियाणा (₹1,649) तीसरे स्थान पर रहा. 

निचले पायदान पर राज्य: दूसरी ओर, ओडिशा में इन खाद्य श्रेणियों पर सबसे कम औसत खर्च (₹656) दर्ज किया गया. इसके बाद पश्चिम बंगाल (₹745) और छत्तीसगढ़ (₹729) का नंबर आता है.

परिवार की बनावट और उम्र तय कर रही है फूड बास्केट

रिपोर्ट में इस बात पर भी खास रोशनी डाली गई है कि केवल इनकम लेवल ही नहीं, बल्कि किसी परिवार की स्ट्रकचर और उसमें रहने वाले सदस्यों की उम्र भी उसके खाने-पीने के खर्च को तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. जिन घरों में बुजुर्गों की आबादी या हिस्सेदारी अधिक होती है, उनका झुकाव स्वास्थ्यवर्धक खान-पान की तरफ ज्यादा होता है. ऐसे परिवार मुख्य रूप से दूध, ताजे फल और हरी सब्जियों पर अधिक बजट खर्च करते हैं. इसके विपरीत, जिन घरों में बच्चों की संख्या ज्यादा होती है, वहां का खर्च अलग पैटर्न पर चलता है. ऐसे परिवार आम तौर पर डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध से बनी चीजें), रेडी-टू-ईट (तैयार खाना) और पैकेज्ड फूड आइटम्स पर ज्यादा पैसे खर्च करते हैं. 

राज्यों के हिसाब से खाने की पसंद 

देश के अलग-अलग राज्यों में खाने के बजट की बनावट में भौगोलिक और सांस्कृतिक अंतर साफ तौर पर देखे जा सकते हैं. हरियाणा में दूध और दूध से बने उत्पादों पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा दर्ज किया गया, जो कुल खाने के खर्च का 28.6% था. झारखंड में घरेलू खाने के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा (38.6%) अकेले अनाज पर खर्च होता है. छत्तीसगढ़ में दालों और सब्जियों का खर्च सबसे ज्यादा देखा गया, जो क्रमशः 20.5% और 14.3% था. नतीजे यह भी बताते हैं कि जिन दो अलग-अलग परिवारों का कुल मासिक खर्च एक जैसा हो सकता है, यह जरूरी नहीं कि उनके खाने-पीने का पैटर्न भी बिल्कुल एक जैसा हो. अनाज और दालों के खर्च में राज्यों के हिसाब से बड़ा अंतर स्थानीय पसंद और पारिवारिक संस्कृति के प्रभाव को साफ दर्शाता है. 

चिंता का एक पहलू: प्रोटीन खपत में अब भी अंतर

भले ही भारतीय परिवार धीरे-धीरे एक बैलेंस्ड और विविध डाइट की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन देश की पूरी आबादी में प्रोटीन की खपत को लेकर असमानता अब भी एक चिंता का विषय बनी हुई है. एसबीआई रिसर्च ने रेखांकित किया है कि अलग-अलग राज्यों और जेंडर ग्रुप्स के बीच प्रोटीन इंटेक में अंतर आज भी मौजूद है. इससे यह स्पष्ट होता है कि हालांकि प्रोटीन युक्त खान-पान के प्रति रुझान बढ़ा है, फिर भी यह ट्रेंड पूरे देश में एक समान रूप से नहीं फैला है. यह रिपोर्ट बताती है कि भारत का कंज्यूमर मार्केट तेजी से परिपक्व हो रहा है, जहां खान-पान की आदतों से लेकर लाइफस्टाइल तक हर मोर्चे पर एक नया बदलाव आ रहा है.