Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की अदाकारी या उज्ज्वल निकम की इंसाफ की जंग? फिल्म की कहानी छू लेगी दिल!

Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की फिल्म ‘प्रहार’ में उज्ज्वल निकम का कानूनी सफर, कसाब केस और परिवार से जुड़े भावनात्मक संघर्ष को दिखाया गया है। जानें फिल्म की कहानी, एक्टिंग और रेटिंग।

Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की अदाकारी या उज्ज्वल निकम की इंसाफ की जंग? फिल्म की कहानी छू लेगी दिल!

Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब के मुकदमे से जुड़े चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन से प्रेरित यह बायोग्राफिकल कोर्टरूम ड्रामा कानून की लड़ाई के साथ एक वकील की निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों पर पड़ने वाले असर को भी दिखाता है। फिल्म में राजकुमार राव की अदाकारी और भावनात्मक कहानी प्रमुख आकर्षण हैं।

Prahaar की कहानी क्या है?

‘प्रहार’ की कहानी 1993 के मुंबई बम धमाकों से लेकर 26/11 आतंकी हमले के बाद अजमल कसाब के मुकदमे तक उज्ज्वल निकम के कानूनी सफर को सामने लाती है। फिल्म दिखाती है कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय दिलाने की प्रक्रिया कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, कहानी सिर्फ अदालत और कानूनी दांव-पेच तक सीमित नहीं रहती। एक तरफ देश के लिए न्याय की लड़ाई है, तो दूसरी तरफ परिवार है, जो अपने करीबी के साथ समय बिताने का इंतजार करता है। काम के प्रति जिम्मेदारी और परिवार के प्रति फर्ज के बीच पैदा होने वाला तनाव फिल्म को भावनात्मक आधार देता है।

फिल्म एक अहम सवाल भी उठाती है—दूसरों को इंसाफ दिलाने की कोशिश में क्या इंसान अपनी निजी जिंदगी से दूर होता चला जाता है?

राजकुमार राव की एक्टिंग कैसी है?

उज्ज्वल निकम की भूमिका में राजकुमार राव का अभिनय फिल्म की बड़ी ताकत है। वह अपने किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाए बिना निभाते हैं। अदालत में उनका आत्मविश्वास और गंभीरता प्रभाव छोड़ता है, जबकि परिवार के साथ समय न बिता पाने की बेबसी उनके भावों में दिखाई देती है।

राजकुमार राव का संयमित अभिनय कोर्टरूम के तनाव और किरदार के निजी संघर्ष, दोनों को प्रभावी ढंग से सामने लाता है।

बाकी कलाकारों ने कैसा काम किया?

फिल्म में वामिका गब्बी का किरदार सीमित होने के बावजूद कहानी में भावनात्मक असर पैदा करता है। सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील की भूमिका में नजर आते हैं, जबकि जयदीप अहलावत भी अपने अभिनय से ध्यान खींचते हैं। अजमल कसाब की भूमिका में ललित प्रभाकर का प्रदर्शन भी कहानी के गंभीर माहौल को मजबूत करता है।