Cyclone Murasu: चक्रवात मुरासु को लेकर प्रशासन सतर्क, आंध्र-ओडिशा में आंधी-बारिश की चेतावनी

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात मुरासु से किन राज्यों में बढ़ेगा बारिश का खतरा? आंध्र प्रदेश में रेड अलर्ट के बीच कितनी उड़ानें हुईं रद्द?

Cyclone Murasu: चक्रवात मुरासु को लेकर प्रशासन सतर्क, आंध्र-ओडिशा में आंधी-बारिश की चेतावनी
Andhra Pradesh News Desk

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और तमिलनाडु में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। वहीं, आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में अत्यंत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट घोषित किया गया है। चक्रवात के खतरे को देखते हुए हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है। चेन्नई में 11 और विजयवाड़ा में 10 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अर्नब के बाद अब मुरासु का खतरा, फिर संकट में आंध्र प्रदेश

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश पिछले सप्ताह आए बेहद गंभीर चक्रवात अर्नब के असर से उबरने की कोशिश कर रहा था। 28 अक्टूबर को इस तूफान ने आंध्र प्रदेश और यानम के तट पर दस्तक दी थी। इसके पहले और दौरान करीब 57 हजार से 84 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। शुरुआती आकलन के मुताबिक, चक्रवात अर्नब से करीब 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लाखों हेक्टेयर में धान और बागवानी की फसलें प्रभावित हुईं। इसके अलावा सैकड़ों घर तबाह हो गए और सड़कों के साथ बिजली व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा।

कहां से आया चक्रवात मुरासु और कितना खतरनाक है यह तूफान

चक्रवात मुरासु की शुरुआत दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र से हुई थी। रविवार, 1 नवंबर को यह एक चक्रवाती तूफान में बदल गया। भारत ने इसे 'मुरासु' नाम दिया है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ प्राचीन ढोल या ड्रम होता है। मौसम विभाग के मुताबिक, 2 नवंबर को यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया। सोमवार तड़के 2:30 बजे यह करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। अनुमान है कि यह 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के शुरुआती घंटों के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकरा सकता है। इसके नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट पार करने की आशंका है। यह क्षेत्र ओंगोल के आसपास स्थित है। IMD के मुताबिक, चक्रवात मुरासु के तट से टकराते समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दो मीटर तक ऊंची लहरें उठने और 24 घंटे में 200 मिमी से अधिक बारिश होने की आशंका है। ओडिशा में भी 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। खतरे को देखते हुए 3 नवंबर की दोपहर तक आंध्र तट और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही और मछली पकड़ने पर रोक लगाने की सलाह दी गई है।

चक्रवात मुरासु की चपेट में आएंगे ये राज्य, किन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

आंध्र प्रदेश: चक्रवात का सबसे ज्यादा असर राज्य के मध्य और दक्षिणी तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और एसपीएसआर नेल्लोर में अत्यंत भारी बारिश की आशंका के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान तटीय इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

तेलंगाना: राज्य में 2 से 5 नवंबर के बीच भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका है। खम्मम, नलगोंडा, सूर्यापेट, महबूबनगर, नागरकर्नूल और वनपर्थी के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा जंगांव, यादाद्री भुवनगिरि, रंगारेड्डी, हैदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरि में भी बारिश का अनुमान है। 3 नवंबर को खम्मम, सूर्यापेट और महबूबाबाद में बारिश हो सकती है। वहीं, भद्राद्री कोठागुडेम, वारंगल और हनमकोंडा में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। हवा के झोंकों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।

ओडिशा: दक्षिणी ओडिशा में 2 से 4 नवंबर के बीच भारी बारिश होने का अनुमान है। 2 नवंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि 3 और 4 नवंबर को कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश की आशंका है। दक्षिणी तटीय जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने का पूर्वानुमान है।

तमिलनाडु: चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है। चेन्नई और तिरुवल्लूर के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, रानीपेट, वेल्लोर और नीलगिरी में भी भारी बारिश का अनुमान है।

मुरासु का खतरा बढ़ते ही अलर्ट मोड में राज्य सरकारें

चक्रवात मुरासु के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने संभावित प्रभावित जिलों में 1,688 मेडिकल टीमें तैनात की हैं। इसके साथ ही 116 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं और 13,165 आपातकालीन बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए जरूरी दवाओं के साथ एंटी-स्नेक वेनम के 43,672 इंजेक्शन भी उपलब्ध कराए गए हैं।आपात स्थिति से निपटने के लिए 108 सेवा की 733 एंबुलेंस, 102 सेवा के तहत 300 थल्ली बिड्डा एक्सप्रेस वाहन और 104 सेवा की 721 मोबाइल मेडिकल यूनिट को अलर्ट पर रखा गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान बारिश, हवाओं की रफ्तार, जलाशयों में पानी के स्तर और एहतियाती उपायों पर चर्चा हुई। चक्रवात के खतरे को देखते हुए नायडू ने 2 नवंबर का अपना प्रस्तावित दिल्ली दौरा भी रद्द कर दिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए।

ओडिशा में अलर्ट, निचले इलाकों से लोगों को निकालने के निर्देश

चक्रवात मुरासु के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने दक्षिणी जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। निचले इलाकों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। ब्लॉक विकास अधिकारियों और तहसीलदारों को प्रभावित क्षेत्रों के लिए माइक्रो-प्लान तैयार करने और जोखिम वाले इलाकों के लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने को कहा गया है।सरकार ने मछुआरों को 2 से 4 नवंबर के बीच समुद्र में न जाने की सलाह दी है। वहीं, संवेदनशील इलाकों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की टीमें तैयार रखी गई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने चक्रवात से निपटने की तैयारियों और सुरक्षा के लिए उठाए गए एहतियाती कदमों की समीक्षा की।