गुलामी के इतिहास पर माफी मांगेगा ब्रिटेन, लेकिन नहीं देगा मुआवजा; जल्द भारत आएंगे पीएम Andy Burnham!

ब्रिटिश PM एंडी बर्नहम ने ऐतिहासिक गुलामी पर माफी की इच्छा जताई, लेकिन मुआवजे से इनकार किया. जल्द भारत दौरे की भी जताई उम्मीद.

गुलामी के इतिहास पर माफी मांगेगा ब्रिटेन, लेकिन नहीं देगा मुआवजा; जल्द भारत आएंगे पीएम Andy Burnham!
Image From Facebook: Andy Burnham

कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से ठीक पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (Andy Burnham ) ने ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दों पर एक बड़ा बयान दिया है. ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' में छपे अपने एक आर्टिकल के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे ट्रांस-अटलांटिक स्लेव ट्रेड यानी ऐतिहासिक गुलामी के व्यापार को लेकर खुले मन से माफी मांगने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि ब्रिटेन इसके बदले किसी भी प्रकार का आर्थिक मुआवजा चुकाने के पक्ष में नहीं है. 

एंडी बर्नहम ने क्या कुछ कहा?

प्रधानमंत्री बर्नहम ने अपने लेख में दर्द और ऐतिहासिक अन्यायों को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें उन पीढ़ियों और लोगों द्वारा झेले गए दर्द का पूरा अहसास है. उन्होंने माना कि अतीत में जो क्रूरता और अमानवीय व्यवहार किया गया था, उसके गहरे निशान आज भी पूरी तरह से मिटे नहीं हैं और समाज पर इसका प्रभाव बना हुआ है. मुआवजे के सवाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए बर्नहम ने तर्क दिया कि मुआवजा बांटना इस समस्या का कोई समाधान नहीं है. उन्होंने कहा कि इसे 'एक अत्याचार के बदले दूसरे तरह का अत्याचार' ही कहा जाएगा, क्योंकि आज के आधुनिक ब्रिटेन के नागरिकों को उन ऐतिहासिक घटनाओं के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. 

ब्रिटिश राजशाही और कूटनीति में बदलाव के संकेत

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स कैरेबियन देशों के आधिकारिक दौरे पर हैं. अपनी यात्रा के दौरान किंग चार्ल्स ने बहामास में गुलामी की कुप्रथा का विशेष रूप से जिक्र किया और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की. गौरतलब है कि ऐतिहासिक रूप से ब्रिटेन की ओर से कभी इस स्तर पर आधिकारिक माफी नहीं मांगी गई थी. लेकिन इस मुद्दे की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए अब ब्रिटेन ने स्थिति को नए दृष्टिकोण से देखने का फैसला किया है. ब्रिटेन का यह भी कहना है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश ने गुलामों के व्यापार से भारी मुनाफा कमाया था, हालांकि बाद में उसने इसे समाप्त करने में भी अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो साल 1833 में ब्रिटेन की संसद ने गुलामी को औपचारिक रूप से गैरकानूनी घोषित कर दिया था. हालांकि, आलोचकों का यह भी मानना है कि संसद में इस तरह का ऐतिहासिक प्रस्ताव पास होने और गुलामी पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद ब्रिटेन ने अन्य देशों पर अपना औपनिवेशिक राज जारी रखा और विभिन्न तरीकों से उनका आर्थिक व सामाजिक शोषण करना नहीं छोड़ा था. 

जल्द भारत दौरे पर आ सकते हैं ब्रिटिश प्रधानमंत्री बर्नहम

ब्रिटेन और भारत के बीच मजबूत होती कूटनीतिक साझेदारियों के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम जल्द ही भारत का आधिकारिक दौरा कर सकते हैं। हाल ही में एक शीर्ष राजनयिक ने दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए इस बात की पुष्टि की है. भारत में कार्यवाहक ब्रिटिश उच्चायुक्त बेन मेलर ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि जब एंडी बर्नहम ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभाला था, उसके तुरंत बाद उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन पर बातचीत हुई थी. उसी बातचीत के दौरान बर्नहम ने भारत आने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की थी. राजनायिक बेन मेलर ने कहा, "मुझे पूरी तरह पता है कि एंडी बर्नहम भारत आने के लिए बेहद उत्सुक हैं. जब उन्होंने पदभार संभाला था, तब प्रधानमंत्री मोदी से सीधी बातचीत में उन्होंने यह बात रखी थी। मुझे पूरा यकीन है कि हम बहुत जल्द इस महत्वपूर्ण यात्रा को धरातल पर उतरते हुए देख पाएंगे.'