6 करोड़ के 40 विला सिर्फ 15 लाख में? IAS शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी प्रशाखा माथुर भी APO
राजस्थान में IPS प्रशाखा माथुर को APO किया गया। पति IAS शिखर अग्रवाल पर 40 विला-कॉटेज की खरीद और पद के दुरुपयोग के आरोपों में ACB जांच जारी है.
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) प्रशाखा माथुर को भी वेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (APO) लिस्ट में डाल दिया है. यह कार्रवाई ठीक उसी तरह की है, जैसी कुछ दिन पहले उनके पति और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (IAS Officer) शिखर अग्रवाल के खिलाफ की गई थी. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के सियासी गलियारों और नौकरशाही में भूचाल ला दिया है. मामला उदयपुर और अलवर में कम कीमत पर 40 विला और कॉटेज खरीदने से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का है, जिसमें एसीबी (ACB) की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के सामने यह बात आई कि 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी (IPS प्रशाखा माथुर) और परिवार के अन्य सदस्यों ने मिलकर एक बड़ी प्राइवेट कंपनी से जुड़े 40 विला और कॉटेज बाजार की तय कीमत से बहुत कम दाम पर खरीदे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कंपनी उदयपुर और अलवर जिलों में होटल और रिसॉर्ट चलाने का काम करती है. आरोप है कि आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल ने अपने आधिकारिक पद का भारी दुरुपयोग किया और उस प्राइवेट कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया.
एसीबी के मुख्य आरोप:
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कम कीमत पर डील: आरोप है कि करीब 6 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाले 40 विला और कॉटेज महज 15 लाख रुपये जैसी बेहद कम कीमत पर खरीदे गए. इनमें से कुछ विला खुद 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर के नाम पर भी रजिस्टर्ड हैं.
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शर्तों में ढील और वित्तीय लाभ: एसीबी का कहना है कि अधिकारी ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए रिसॉर्ट निर्माण से जुड़े नियमों और शर्तों में ढील दी, बिना उचित दस्तावेजों के सत्यापन के अप्रूवल दिए और कंपनी के लिए एक विशेष रियायती वित्तीय पैकेज (Financial Package) पास करवाया.
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फर्जीवाड़े का शक: सबसे दिलचस्प और गंभीर बात यह सामने आई कि जिस दिन (27 मार्च को) राज्य के वित्त विभाग ने उस कंपनी को स्पेशल फाइनेंशियल पैकेज देने का आदेश जारी किया, ठीक उसी दिन कथित तौर पर 20 विला अकेले शिखर अग्रवाल के नाम पर रजिस्टर किए गए थे.
पति-पत्नी दोनों पर गिरी गाज
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IAS शिखर अग्रवाल: उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके शिखर अग्रवाल को उनके और परिवार के प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन विवादों के चलते 28 अक्टूबर को ही एपीओ (APO) कर दिया गया था. राज्य सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत विस्तृत एसीबी जांच को हरी झंडी दे दी है. एसीबी के महानिदेशक (DG) गोविंद गुप्ता के मुताबिक, शुरुआती जांच में प्राथमिक तौर पर ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं जो पद के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं.
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IPS प्रशाखा माथुर: जयपुर में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP - प्लानिंग, आधुनिकीकरण और कल्याण) के पद पर तैनात 1995 बैच की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शनिवार (31 अक्टूबर) को अगले आदेश तक एपीओ लिस्ट में डाल दिया गया है.
पूर्व सीएम अशोक गहलोत का तीखा हमला, सीबीआई-ईडी जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद राजस्थान की राजनीति गरमा गई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला है. कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि सिर्फ अधिकारियों को एपीओ कर देना काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
गहलोत के मुख्य सवाल और आरोप
पूर्व सीएम ने सवाल उठाया कि चूंकि एसीबी सीधे मुख्यमंत्री के अधीन काम करती है और यह पूरा मामला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों में लिए गए फैसलों से जुड़ा है, तो क्या राज्य के अधीन काम करने वाली एसीबी इस मामले की स्वतंत्र जांच कर सकती है?. गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सबसे करीबी और ताकतवर अधिकारियों में से एक रहे हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी महत्वपूर्ण पद संभाला है. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब लगभग 6 करोड़ की प्रॉपर्टी सिर्फ 15 लाख में बेची गई और बाद में उसे वापस उसी कंपनी को लीज पर दे दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं, तो क्या ऐसी कोई रियायती स्कीम आम जनता के लिए भी है? क्या यह विशेष योजना सिर्फ शिखर अग्रवाल के परिवार के लिए बनाई गई थी? मुख्यमंत्री को इस पर जवाब देना चाहिए. कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने भले ही अधिकारी को एपीओ कर दिया हो और एसीबी को शुरुआती जांच की अनुमति दे दी हो, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई है.
