हमारी रोजी रोटी का सवाल है! CTI ने अखिलेश-ममता समेत विपक्षी नेताओं से की बड़ी अपील; बदल दें तारीख और जगह

दिल्ली में 1 नवंबर की दिल्ली चलो रैली को लेकर CTI ने विपक्षी नेताओं से तारीख या जगह बदलने की अपील की है. व्यापारियों को 12 हजार करोड़ के नुकसान का डर.

हमारी रोजी रोटी का सवाल है! CTI ने अखिलेश-ममता समेत विपक्षी नेताओं से की बड़ी अपील; बदल दें तारीख और जगह
Image From X Handle: @NehaAisa

त्योहारों के इस रौनक भरे मौसम में देश की राजधानी दिल्ली से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है. दीवाली के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण दिनों के बीच, 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के शीर्ष नेताओं से हाथ जोड़कर एक गंभीर अपील की है। CTI ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत तमाम बड़े विपक्षी दिग्गजों को पत्र लिखकर 1 नवंबर को प्रस्तावित 'दिल्ली चलो' रैली के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. व्यापारी संगठनों का कहना है कि सालभर में दीवाली का यह ऐसा समय होता है जब दुकानदारों और व्यापारियों की सबसे ज्यादा कमाई होती है. ऐसे में इस पीक सीजन में होने वाली इस विशाल रैली से दिल्ली के व्यापार को भारी झटका लग सकता है. 

10,000 करोड़ से ज्यादा के व्यापारिक नुकसान की आशंका

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल द्वारा जारी किए गए पत्र में यह स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि इस रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 प्रमुख और ऐतिहासिक बाजारों में लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यापारिक नुकसान (Business Loss) हो सकता है. संगठन का तर्क है कि 1 नवंबर का दिन दीवाली की तैयारियों और खरीदारी के लिहाज से सबसे अहम और व्यस्त दिनों में गिना जाता है. ऐसे में यदि राजधानी में कोई बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन होता है, तो इसका सीधा असर बाजारों की रौनक और बिक्री पर पड़ेगा. 

'लाखों लोगों की भीड़ और गाड़ियों से लग जाएगा लॉकडाउन जैसा जाम'

व्यापारियों की चिंता सिर्फ बिजनेस के नुकसान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर भी उनका डर साफझलकता है. CTI का अनुमान है कि इस मेगा रैली में लगभग 10 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही, रैली में आने वाले लोगों की 15,000 से 20,000 गाड़ियां सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली के रास्तों पर उतरेंगी. इतनी भारी संख्या में वाहनों के आने से पार्किंग की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी. संगठन का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू (JLN) मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक जैसे व्यस्त इलाकों के आसपास गाड़ियां पार्क करने की पर्याप्त जगह नहीं है. अगर ऐसा होता है, तो मध्य और पुरानी दिल्ली में ऐसा 'लॉकडाउन' जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी कि पूरा शहर जाम की गिरफ्त में आ जाएगा और आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों का सड़कों पर चलना भी मुहाल हो जाएगा. 

'राहुल गांधी और सोनिया गांधी को भी लिखा जा चुका है पत्र'

व्यापारी निकाय ने अपनी बात पर जोर देते हुए बताया कि वे इस संबंध में कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से पहले ही गुहार लगा चुके हैं. CTI के मुताबिक, वे राहुल गांधी को पहले ही तीन पत्र भेज चुके हैं और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी अपील कर चुके हैं. अब विपक्षी गठबंधन के बाकी बड़े नेताओं से ही व्यापारियों की आखिरी उम्मीद जुड़ी है. पत्र में CTI ने बेहद भावुक अंदाज में कहा है, 'हम किसी भी राजनीतिक रैली या विरोध प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं. हमारी लड़ाई सियासत से नहीं, बल्कि अपनी रोजी-रोटी को बचाने की है. दीवाली का यह समय हमारे लिए जीवन-मरण जैसा है। धनतेरस 6 नवंबर को है और दीवाली 8 नवंबर को, ऐसे में 1 नवंबर का दिन तैयारियों के लिए सबसे पीक समय है. अगर इस दिन सब कुछ ठप हो गया, तो हजारों व्यापारी और उनके परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे.'

2.5 लाख दुकानें बंद हो सकती हैं

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर राहुल गांधी को चौथा पत्र लिखा है. CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल का दावा है कि: 

लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद हो सकती हैं
10 km के दायरे में ट्रांसपोर्ट सेवा रुक सकती है
20 बाजारों में 80% कारोबार प्रभावित हो सकता है
दिवाली के समय होने वाला 10,000-12,000 करोड़ रुपये का दैनिक कारोबार खतरे में है. उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से अपील की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि व्यापारियों की आजीविका पर कोई असर न पड़े

व्यापारियों की ओर से दिए गए दो बड़े सुझाव

व्यापार जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए CTI ने विपक्षी नेतृत्व के सामने दो व्यावहारिक विकल्प भी रखे हैं:

  1. तारीख में बदलाव: रैली को दीवाली के बाद यानी 10-11 नवंबर या उसके बाद के लिए रीशेड्यूल (पुनर्निर्धारित) किया जाए

  2. स्थान में बदलाव: यदि रैली का होना अनिवार्य ही है, तो इसके वेन्यू को रामलीला मैदान से बदलकर 'बुराड़ी ग्राउंड' या किसी अन्य खुले इलाके में शिफ्ट कर दिया जाए, ताकि शहर के मुख्य बाजार और ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित न हो