अब एयरपोर्ट पर चेहरे से होगी पहचान, पासपोर्ट और बोर्डिंग पास दिखाने की झंझट होगी कम

नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डिजी यात्रा फाउंडेशन ने नई पहल की है। बता दें डिजी यात्रा इस परेशानी को कम करने की तैयारी में है। अब चेहरे की पहचान से यात्रियों की पहचान की जाएगी।

अब एयरपोर्ट पर चेहरे से होगी पहचान, पासपोर्ट और बोर्डिंग पास दिखाने की झंझट होगी कम

विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए अच्छी खबर है। अब एयरपोर्ट पर बार-बार पासपोर्ट निकालने की परेशानी कम होगी। बोर्डिंग पास दिखाने की जरूरत भी कम पड़ सकती है। इससे एयरपोर्ट पर एंट्री और बोर्डिंग की प्रक्रिया आसान हो सकती है। दोनों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए डिजी यात्रा का ट्रायल शुरू किया है। यह ट्रायल नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा। इसे देश के सात हवाई अड्डों पर चलाया जाएगा।

कैसे काम करती है डिजी यात्रा?

खबरों के मुताबिक, डिजी यात्रा में चेहरे की पहचान से यात्रियों की जांच होती है। इसके लिए एयरपोर्ट पर खास मशीनें लगाई जाती हैं। इन्हें बायोमेट्रिक ई-गेट कहा जाता है। ये मशीनें एयरपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में लगी होती हैं। इनमें एंट्री गेट, सिक्योरिटी चेकपॉइंट और बोर्डिंग गेट शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, इन गेट पर लगे कैमरे यात्री का चेहरा स्कैन करते हैं। इसके बाद स्कैन का मिलान पहले से दर्ज जानकारी से होता है। अगर दोनों का मिलान सही मिलता है, तो गेट खुल जाता है। इस तरह यात्री बिना बार-बार कागजात दिखाए आगे बढ़ सकते हैं। इससे एयरपोर्ट पर जांच की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

किसे मिलेगी डिजी यात्रा की सुविधा?

जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह सुविधा सभी को नहीं मिलेगी। फिलहाल इसका फायदा पात्र भारतीय नागरिक ही उठा सकेंगे। इसके लिए यात्रियों के पास चिप वाला ई-पासपोर्ट होना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुविधा चुनिंदा उड़ानों पर ही मिलेगी। इसमें एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानों का भी जिक्र है। यानी हर अंतरराष्ट्रीय उड़ान में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। जिस एयरपोर्ट पर यह सेवा शुरू नहीं होगी, वहां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसलिए यात्रा से पहले सुविधा की उपलब्धता जरूर जांच लें।

चेहरे से पहचान का सिस्टम कितना सुरक्षित है?

खबरों के मुताबिक, डिजी यात्रा में चेहरे की पहचान से वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे यात्रियों की जांच में लगने वाला समय कम हो सकता है। जानकारी में कुछ सेकंड में वेरिफिकेशन होने की बात कही गई है। हालांकि, इसकी पुष्टि करने वाला कोई आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। डेटा सुरक्षा को लेकर भी कुछ दावे किए गए हैं। बताया गया है कि यात्रियों का डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा। इसके अलावा डेटा 24 घंटे में अपने आप डिलीट होने की बात है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए डेटा सुरक्षा से जुड़े नियमों की स्पष्ट जानकारी जरूरी है। फेशियल रिकग्निशन से फर्जी डॉक्यूमेंट्स की गुंजाइश कम हो सकती है। इस तकनीक में चेहरे का मिलान पहचान के लिए किया जाता है। इससे जांच की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। 

डिजी यात्रा का ट्रायल नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलेगा। यह ट्रायल देश के सात हवाई अड्डों पर होगा। इसके नतीजों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। अगर ट्रायल सफल रहता है, तो सुविधा का विस्तार हो सकता है। डिजी यात्रा ने अब तक 100 मिलियन यात्राएं पूरी होने की जानकारी दी है। संगठन के मुताबिक, यह सेवा 38 हवाई अड्डों पर उपलब्ध है। हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की स्थिति अलग हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा में इसका कितना फायदा मिलेगा, यह ट्रायल बताएगा।