'वोट चोरी' पर BJP का कांग्रेस को जवाब, संबित पात्रा बोले- असली वोट चोरी तो नेहरू ने की थी
'वोट चोरी' के आरोपों पर संबित पात्रा ने कांग्रेस को घेरा। 1946 में नेहरू-पटेल के बीच कांग्रेस अध्यक्ष पद के विवाद का भी किया जिक्र.
देश की राजनीति में इन दिनों 'वोट चोरी' का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष द्वारा हाल ही में आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा पलटवार किया है. भाजपा ने इसे विपक्ष का राजनीतिक ड्रामा करार देते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा.
'असली वोट चोरी तो नेहरू ने की थी'
31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर भाजपा प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि विपक्ष जो 'वोट चोरी' का आरोप लगा रहा है, उसकी सच्चाई कुछ और ही है. पात्रा ने कहा, 'वोट चोरी में सच्चाई है, यह हुई थी. आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। हिंदुस्तान में पहली बार कहीं वोट चोरी हुई, तो वह गांधी परिवार के पहले सदस्य पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का वोट चोरी करके की थी और पंडित नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने थे.' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रांतीय समितियों की पसंद सरदार पटेल थे, लेकिन उन्हें दरकिनार कर पटेल का अपमान किया गया और नेहरू को प्रधानमंत्री पद पर बैठाया गया.
क्या था 1946 का ऐतिहासिक घटनाक्रम?
भाजपा जिस घटना का जिक्र कर रही है, वह साल 1946 की है. उस दौर के राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक, जो व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष बनता था, उसे ही देश की अंतरिम सरकार का प्रमुख (प्रधानमंत्री) माना जाता था. समितियों की पसंद: देश की कुल 15 प्रांतीय कांग्रेस समितियों में से 12 समितियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम का प्रस्ताव रखा था। बाकी की 3 समितियों ने भी पंडित नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया था. महात्मा गांधी का हस्तक्षेप: हालांकि, बाद में महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद सरदार पटेल और अन्य नेताओं ने अपने नाम वापस ले लिए, जिसके बाद नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में पारंपरिक रूप से कोई आम वोटिंग नहीं हुई थी, बल्कि प्रांतीय समितियों द्वारा नाम प्रस्तावित किए गए थे. इसी घटना को आधार बनाकर भाजपा अब कांग्रेस पर तंज कस रही है.
खड़गे जी बार बार झूठ बोलकर राहुल गांधी की बातों को सच सिद्ध नहीं कर सकते। https://t.co/mWhPL2dOLI
— Sambit Patra (@sambitswaraj) October 31, 2026
'असली संसद में सोते और गायब रहते हैं नेता'
विपक्ष द्वारा आयोजित 'मॉक पार्लियामेंट' पर कटाक्ष करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि जो लोग बाहर मॉक संसद चला रहे हैं, वे असली संसद में अपनी जिम्मेदारियों से दूर रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के भीतर ये लोग या तो सोते रहते हैं, आंखें मारते हैं या फिर सिर्फ हंगामा करते हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे अक्सर सदन से ही गायब रहते हैं.
13 करोड़ वोट काटे जाने के दावे पर सफाई
विपक्ष द्वारा लगाए गए उस गंभीर आरोप पर भी भाजपा ने जवाब दिया, जिसमें कहा जा रहा है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत देश में 13 करोड़ लोगों के नाम काट दिए गए हैं. संबित पात्रा ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, 'अगर 13 करोड़ असली लोगों के नाम काटे गए होते, तो देश की जनता सड़कों पर उतर आती.' उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान भी 10 बार एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, तब किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया था. घुसपैठियों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पात्रा ने सवाल किया, 'क्या हमारे देश में कोई घुसपैठिया वोटर होना चाहिए? भारत में वोट देने का अधिकार केवल और केवल एक भारतीय नागरिक का है. इस देश में भारतीय ही वोट डालेगा, कोई घुसपैठिया नहीं.' उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की एक पूरी पारदर्शी प्रक्रिया है और यदि किसी का नाम छूट गया है, तो वह फॉर्म भरकर अपना नाम दर्ज करवा सकता है.
